बच्चों के नैतिक, बौद्धिक व आध्यात्मिक विकास के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स।

 🌼 *आज के माहौल में बच्चों को अच्छी प्रेरणा व संस्कार देने के लिए कुछ जरूरी बातें हम ध्यान में रख सकते है* 🌼

*मातृमान पितृमानचार्यवान पुरुषो वेद।*

अर्थात: जब तीन उत्तम शिक्षक अर्थात एक माता, दूसरा पिता और तीसरा आचार्य हो तभी मनुष्य ज्ञानवान होता है।



1. घर में देश भक्ति, प्रेरणादायक एवं प्रकृति प्रेम के गीत, संस्कृत के श्लोक आदि जरूर चलाएं, सुनाए एवं उन्हें याद भी करवाएं।


2. घरों में स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, शहीद भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई आदि महापुरुषों, क्रांतिकारियों एवं समाज सुधारकों की कविताएं और पोस्टर्स, जरूर लगाएं, एवं उनके जीवन परिचय, कविताएं आदि को उन्हें प्रतिदिन सुनाते रहे।


3. मोबाइल में भी भारत माता, समाज सुधारकों, क्रांतिकारियों, देश भक्तों, देश बलिदानों आदि के फ़ोटो, कविता, स्लोगन आदि अच्छे वॉलपेपर, थीम लगाएं।


4. टीवी में अधिकतर कार्यक्रम, फिल्में, सीरियल्स आदि अनैतिकता, अंधविश्वास, मिथ्या को बढ़ावा देते है अतः हम घरों में योग, सांस्कृतिक, नैतिक विचारों वाले कार्यक्रम ही देखें व दिखाएं, जिससे एक अच्छा माहौल भी बन सके और फालतू जानकारी से बच्चों को भ्रमित होने से बचा सके।


5. घरों में पौधे आदि लगाएं एवं बच्चों को उनका ध्यान रखने की जिम्मेदारी दें।


6. बच्चों की दिनचर्या बनाएं की किस समय जागना है, कब सोना है, कब पढ़ना है कब खेलना है, आदि ये सारे कार्य नियम से होने चाहिए।


7. बच्चों को व्यायाम जरूर करवाएं जिससे उनके शरीर व बुद्धि का पूर्ण विकास हो सके, एवं निरोगी रहें।


8. कम से कम आधा या एक घंटा आंखें बंद करवाकर ध्यान करवाना भी जरूरी है इससे उनका आत्मविकास होता है, एकाग्रता बढ़ती है, चिंतनशील बनते है एवं मानसिक शांति भी मिलती है।


9. दैनिक रूप से हाथ जोड़, हल्का सा सर झुका कर, बड़ो का अभिवादन (नमस्ते) करने की आदत डलवाएं, जिससे अहंकार खत्म होता है।


10. सदैव घर का नैतिक व आध्यात्मिक माहौल हो जिससे उनका भी नैतिक व आध्यात्मिक विकास हो एवं आगे चलके जो भी उन्हें व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक व राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिले तो वे इसे ईमानदारी, व निष्ठा से करें तभी समाज का कल्याण हो सकता है, यदि कोई बहुत पढ़ले पर उसमें नैतिक व आध्यात्मिक गुण न हो तो वे अपने व्यवहार से जहां भी होंगे हानि व दूसरों को कष्ट ही पहुंचाएंगे।


11. विद्यार्थियों को कम, पौष्टिक शुद्ध व सात्विक व घर का बना ही आहार दें, अतः आज के खान-पान जैसे कोल्ड्रिंक, चाउमीन, पिज़्ज़ा आदि चीजों से बचाएं।


12. गर्मियों व सर्दियों की छुट्टियों में उन्हें नानी के घर भेजने से अच्छा है कि अपने शहर में बच्चों के लिए आयोजित संस्कारशाला, आवासीय शिविर आदि में भेजे जिससे उनका पूर्ण विकास हो सके, अतः यह विद्यालयों में होना काफी नही है क्योंकि ज्यादातर प्राइवेट विद्यालय अपने ग्राहकों को आकर्षित करने व धन के लिए ही विद्यालय चलाते है उनका बच्चे के विकास से कोई लेना देना नही है।


13. बच्चों को सिर्फ ऐसी जगह घुमाने ले जाएं जहाँ से वे बहुत सी जानकारी व प्रेरणा ले सके जैसे अमृतसर   जालियाँ वाला बाग, बाघा बॉर्डर, झाँसी का किला आदि।


14. बच्चों के शिक्षकों, ट्यूटर्स का चयन भी सोच समझ कर करें जो शिक्षक चाहे कितने ही बुद्धिमान हो पर अच्छा आचरण न हो, नैतिकता न हो, ऐसे शिक्षकों से कभी न पढ़वाए।


15. इस देश का कल्याण तब ही हो सकता है जब प्रत्येक माता-पिता, जागरूक, आदर्श गुणों से परिपूर्ण हो और अपने बच्चों को भी ऐसा ही उपदेश करे, इसके लिए हमे स्वयं को श्रेष्ठ बनाना होगा।



        *एक बार सत्यार्थ प्रकाश अवश्य पढ़े।*

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